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Party Shiksha Series - 5 - Karmasuchi - পার্টি শিক্ষা সিরিজ - ৫ - কর্মসূচি
- Communist Party of India (Marxist) Party Education Sub-Committee

Paris Commune

पेरिस कम्यून

Author/লেখক
Dr. Mahadev Saha • ড: মহাদেব সাহা

Category/বিভাগ
History
ইতিহাস

Publisher/প্রকাশক
National Book Agency Private Limited
এনবিএ প্রাইভেট লিমিটেড

Language/ভাষা
Hindi - হিন্দি

First Publication Year/প্রথম প্রকাশ
2012 • ২০১২

Publication Year/প্রকাশ
2012

Edition/সংস্করণ
1

Binding/বাঁধাই
Paperback • পেপারব্যাক
20x12x0.5 cms
100 gms

Number of Pages/পাতা
96

Price/মূল্য
50

Discounted Price/বর্তমান মূল্য
₹ 25

Few words on Paris Commune | पेरिस कम्यून


मजदूर वर्ग के प्रथम राज्य महान पेरिस कम्यून के 'कम्युनादों' ने अपनी कुर्बानी और बहादुरी से कम्यून की स्थापना करके अंतर्राष्ट्रीय मजदूर आंदोलन के इतिहास पर एक अभूतपूर्व गहरी और अमर छाप छोड़ी है। लेनिन ने लिखा है "कम्यून के लड़ाकों की याद को न सिर्फ फ्रांस के बल्कि सारी दुनिया के सर्वहारा की ओर से सम्मान मिला है। कम्यून किसी स्थानीय या राष्ट्रीय उद्देश्य से  प्रेरित होकर नहीं, बल्कि तमाम मेहनतकश मानवता और दलितों-पीड़ितों की मुक्ति के लिये जूझा। इसके जीवन और अवसान की गाथा, फ्रांस की राजधानी पर दो महीनों तक छा जानेवाली इसकी सत्ता सर्वहारा के वेगपूर्ण संघर्ष और पराजय के बाद यंत्रणा झेलने का चमत्कारी साहस इन सारे उदाहरणों ने मजदूरों की चेतना को प्रबल स्फूर्ति प्रदान की, उनकी आशाओं को उद्वेलित किया। समाजवादी लक्ष्य के लिये उनके मन में अपरिमित समर्थन और सहानुभूति का भाव पैदा किया। पेरिस में तोपों की गरज ने सर्वहारा की सबसे पिछली कतार तक को उसकी गहरी नींद से झकझोर कर जगा दिया, हर दिशा में समाजवादी प्रचार की ध्वनि गूंजने लगी ।... कम्यून का लक्ष्य सामाजिक क्रांति का लक्ष्य-मेहनतकशों को पूर्ण आर्थिक राजनीतिक मुक्ति का लक्ष्य है। यह सारे संसार के सर्वहारा की जगमगाती मंजिल है और इसी अर्थ में यह अजर-अमर है।"   विश्व-सर्वहारा आंदोलन के देदीप्यमान प्रकाश स्तंभ कम्यून का अंत हो गया। सर्वहारा परिवारों के भोले-भाले बहादुर मर्म और औरतें (कम्यूनार्द) इस वीरता से लड़ें... कि उनके रक्त से लिखी हुई वीरगाथा युगों-युगों तक मेहनतकशों और मजदूरों को प्रेरणा देती रहेगी।   तमाम दुनिया का सर्वहारा फ्रांसीसी सर्वहारा की इन महान संतानों की याद को सलाम करता है।  मार्क्स के शब्दों में : “पेरिस के मज़दूर और उनका कम्यून, हमेशा नये समाज के पथ प्रदर्शक के रूप में सम्मानित रहेंगे। शहीदों के स्मारक मजदूरों के दिलों में बने हुए हैं...।"   इसलिये हिंदी भाषी क्षेत्र की आम जनता, खासतौर से मजदूरों के लिये, पेरिस कम्यून पर डा. महादेव साहा द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक बहुत महत्व की होगी और उन तमाम लोगों को प्रेरणा देगी जो सर्वहारा के अधिनायकत्व के लिये संग्रामरत है।


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